भीतर जाने का कोई छोटा रास्ता नहीं है। सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन नीचे मैदानों के किनारे हैं; वहाँ से गोविंदघाट के ट्रेलहेड तक लगभग 270 किमी पहाड़ी हाईवे है, और फिर क़रीब 14 किमी और — चार जीप से और बाक़ी पैदल — घांघरिया गाँव तक। मैदानों से घांघरिया तक दो दिन और लौटने में भी उतने ही मानकर चलिए।
चरण 1: हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून पहुँचिए
- हवाई मार्ग से: सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है, जहाँ दिल्ली और कई अन्य भारतीय शहरों से उड़ानें आती हैं। यह ऋषिकेश से लगभग 20 किमी और हरिद्वार से 35–40 किमी है। पहले से बुक किया ट्रांसफ़र या प्रीपेड टैक्सी 30–60 मिनट लेती है।
- ट्रेन से: हरिद्वार जंक्शन मुख्य रेलहेड है, जहाँ दिल्ली से रोज़ कई ट्रेनें (लगभग चार से छह घंटे) और पूरे भारत से सीधी सेवाएँ आती हैं। कुछ कम ट्रेनें आगे ऋषिकेश और योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन तक जाती हैं।
- दिल्ली से सड़क द्वारा: हरिद्वार लगभग 220 किमी और ऋषिकेश 240 किमी, कार या रात की बस से आम तौर पर पाँच से सात घंटे। सामान के साथ प्राइवेट ट्रांसफ़र सबसे आसान विकल्प है।
चरण 2: जोशीमठ और गोविंदघाट की सड़क
ऋषिकेश से बदरीनाथ हाईवे — पुराना एनएच-58, जो अब एनएच 7 कहलाता है — पूरी दूरी तक पहले गंगा और फिर अलकनंदा की घाटी में चढ़ता है। जोशीमठ तक यह नौ से ग्यारह घंटे की शानदार और थकाने वाली ड्राइव है, जो पंच प्रयाग के पाँचों संगमों से गुज़रती है। पड़ाव कुछ इस तरह हैं:
| पड़ाव | ऋषिकेश से लगभग दूरी | वहाँ क्या है |
|---|---|---|
| ऋषिकेश | 0 किमी | जल्दी निकलिए — सुबह 5 से 6 बजे सामान्य है |
| देवप्रयाग | 70 किमी | भागीरथी + अलकनंदा = गंगा; हाईवे पर व्यू-पॉइंट |
| श्रीनगर (गढ़वाल) | 105 किमी | मार्ग का सबसे बड़ा नगर; ईंधन, भोजन, एटीएम |
| रुद्रप्रयाग | 140 किमी | अलकनंदा और मंदाकिनी का संगम; केदारनाथ की सड़क मुड़ती है |
| कर्णप्रयाग | 170 किमी | पिंडर नदी के साथ संगम |
| चमोली / पीपलकोटी | 200–215 किमी | जोशीमठ से पहले का आम रात्रि पड़ाव |
| जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) | 250–255 किमी | सामान्य रात्रि पड़ाव; आख़िरी भरोसेमंद एटीएम |
| गोविंदघाट | 270–275 किमी | ट्रेलहेड; पुलना के लिए जीपें |
सड़क तय करने के तरीक़े
- ड्राइवर सहित प्राइवेट कार: सबसे आरामदेह और लचीला विकल्प, जो ऋषिकेश या हरिद्वार में या ट्रेक पैकेज के हिस्से के रूप में बुक होता है। पहाड़ी सड़कों का अनुभवी ड्राइवर लीजिए।
- बस: सरकारी परिवहन और निजी बसें सुबह तड़के ऋषिकेश और हरिद्वार से जोशीमठ और बदरीनाथ के लिए निकलती हैं। ये सस्ती और धीमी हैं, और ज़्यादातर अँधेरे के बाद नहीं चलतीं।
- शेयर्ड जीप: शेयर्ड टैक्सियाँ टुकड़ों में चलती हैं (ऋषिकेश–श्रीनगर–रुद्रप्रयाग–चमोली–जोशीमठ)। बस से तेज़, पैरों के लिए कम जगह।
चरण 3: जोशीमठ से गोविंदघाट और पुलना
गोविंदघाट बदरीनाथ मार्ग पर जोशीमठ से लगभग 20 किमी आगे है — टैक्सी, शेयर्ड जीप या बस से क़रीब एक घंटा। गोविंदघाट से एक सँकरी सड़क अलकनंदा पार करके लगभग चार किलोमीटर चढ़कर पुलना गाँव पहुँचती है; शेयर्ड जीपें सुबह तड़के से थोड़े-से किराये पर ऊपर-नीचे चलती हैं। निजी वाहन आम तौर पर गोविंदघाट में पार्क किए जाते हैं।
चरण 4: पुलना से घांघरिया
- पैदल: लक्ष्मण गंगा के किनारे चौड़े पत्थर के रास्ते पर लगभग 9–10 किमी और 1,000 मीटर की चढ़ाई, हर एक-दो किलोमीटर पर चाय की दुकानों के साथ। ज़्यादातर लोगों को चार से छह घंटे लगते हैं। लगभग आधे रास्ते पर भ्यूंडार गाँव तक ढाल हल्की है और आख़िरी तीन किलोमीटर में खड़ी।
- खच्चर से: सवारी और सामान के खच्चर गोविंदघाट और पुलना के स्टैंड पर सीज़न के लिए तय दरों पर मिलते हैं।
- पोर्टर से: पोर्टर बैग ढोते हैं, और बच्चों या कम चल पाने वाले आगंतुकों को टोकरी या कुर्सी में भी ले जाते हैं।
- हेलीकॉप्टर से: सीज़न में गोविंदघाट और घांघरिया के बीच आम तौर पर एक छोटी शटल उड़ती है। यह पैदल चलने से बचाती है, पर पूरी तरह मौसम पर निर्भर है और जुलाई-अगस्त में अक्सर बंद रहती है। मौजूदा ऑपरेटर, किराया और सामान की सीमा मौक़े पर जाँच लें।
चरण 5: घांघरिया से आगे
दोनों लक्ष्य गाँव से दिन भर की पैदल यात्राएँ हैं। फूलों की घाटी बाईं ओर के रास्ते पर लगभग तीन से चार किलोमीटर ऊपर शुरू होती है; हेमकुंड साहिब दाईं ओर के रास्ते पर छह खड़े किलोमीटर ऊपर है। खच्चर हेमकुंड तक जाते हैं, पर राष्ट्रीय उद्यान में उनकी अनुमति नहीं है।
पंजीकरण और काग़ज़ात
- हाल के सीज़नों में उत्तराखंड सरकार ने चार धाम और हेमकुंड साहिब मार्गों के यात्रियों के लिए पहले से पंजीकरण — ऑनलाइन या रास्ते के काउंटरों पर — अनिवार्य किया है। नियम और प्रक्रिया साल-दर-साल बदलते रहे हैं — यात्रा से पहले राज्य पर्यटन की वेबसाइट देख लें।
- ख़ुद फूलों की घाटी के लिए केवल प्रवेश टिकट चाहिए, जो घांघरिया के पास वन चेक पोस्ट पर मिलता है। फ़ोटो पहचान पत्र साथ रखिए (विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट)।
- अपने पहचान पत्र की कुछ फ़ोटोकॉपी साथ रखिए; कई काउंटरों पर ये माँगी जाती हैं।
वापसी
वापसी उसी मार्ग से उल्टे क्रम में है। तीन से चार घंटे में पुलना उतरिए, और या तो जोशीमठ में सोइए या — जल्दी निकलें तो — पहले बदरीनाथ की साइड ट्रिप कर लीजिए। ऋषिकेश की ड्राइव के लिए पूरा एक दिन रखिए।

